उत्तराखंड

विधि विधान के साथ बंद हुए बद्रीनाथ धाम के कपाट

चमोली। बीते 5 दिनों से चल रही कपाट बंद होने की पंच पूजा के बाद शनिवार को अंतिम दिन पूजा-पाठ और मंत्रोंच्चारण के साथ भगवान बद्रीनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस अवसर पर धाम की फूलों से भव्य सजावट की गई थी तथा धाम पहुंचे हजारों श्रद्धालु इस अवसर के साक्षी बने।
तय समय के अनुसार भगवान बद्रीनाथ मंदिर के कपाट शनिवार सांय 3.30 बजे बंद किए गए और भगवान बद्रीनाथ की चल विग्रह डोली अपने शीतकालीन प्रवास के लिए जोशीमठ के लिए रवाना हो गई है। कपाट बंद होने से पूर्व भगवान बद्रीनाथ की विशेष पूजा अर्चना की गई। माणा गांव की महिला मंगल दल द्वारा तैयार किया गया कंबल भगवान बद्री विशाल को ओढ़ाया गया। मंदिर परिसर और सिंह द्वार को 15 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया था।
16 नवंबर को शुरू हुई कपाट बंद करने की प्रक्रिया के दौरान पहले दिन भगवान गणेश के मंदिर के कपाट बंद किए गए थे इसके बाद आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य के मंदिर के कपाट बंद किए गए। बीते कल मुख्य पुजारी रावल ईश्वरी प्रसाद नम्बूदरी द्वारा मां लक्ष्मी को गर्भ ग्रह में लाया गया। आज विशेष पूजा अर्चना के बाद 3.30 बजे विधि विधान से मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए और भगवान बद्रीनाथ की चल विग्रह डोली अपने शीतकालीन प्रवास के लिए जोशीमठ के लिए रवाना हो गई।
आज भगवान बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ चार धाम यात्रा का भी समापन हो गया। इस साल 17.50 लाख से अधिक श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंचे।

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