चमोली
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उप जिलाधिकारी कार्यालय प्रांगण बना विद्यालय परिसर: बिना अध्यापकों के ही चली कक्षाएं।

राजीव गांधी अभिनव विद्यालय को विलय किये जाने का छात्र छात्राएं कर रहे हैं विरोध

चमोली : राजीव गांधी अभिनव आवासीय विद्यालय जोशीमठ को राजकीय इंटर कॉलेज जोशीमठ में विलय के जाने के विरोध में छात्र छात्राओं ने तहसील परिसर जोशीमठ में बैठकर अपना विरोध दर्ज किया। छात्र-छात्राएं सुबह ही अपने तय विद्यालय समय पर उप जिलाधिकारी कार्यालय जोशीमठ के प्रांगण में पहुंचकर शांतिपूर्वक तरीके से धरने पर बैठ गए। इस दौरान छात्र-छात्राएं अपना गृह कार्य और स्वाध्याय करते हुए नजर आए। छात्र छात्राओं का कहना है कि जब तक सरकार राजीव गांधी अभिनव आवासीय विद्यालय को मर्ज करने का फैसला वापस नहीं लेती है तब तक इसी तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उनका कहना है अंग्रेजी माध्यम के स्कूल को अचानक से हिंदी माध्यम के विद्यालय में विलय करके हमारे भविष्य को खराब किए जाने का षड्यंत्र सरकार रच रही है।


इससे पूर्व छात्र-छात्राएं बाल संरक्षण आयोग, मुख्यमंत्री उत्तराखंड को भी स्कूल बंद न किए जाने के संबंध में पत्र लिख चुके हैं। गौरतलब है की सरकार द्वारा प्रदेश के चार अति दुर्गम ब्लॉक जोशीमठ, जयहरीखाल, बेतालघाट और बेरीनाग में संचालित अंग्रेजी माध्यम के राजीव गांधी अभिनव आवासीय विद्यालयों को राजकीय इंटर कॉलेजों में विलय किए जाने का आदेश दिया गया है। संबंधित आदेशों के अनुपालन में प्रभारी प्राचार्य राजीव गांधी अभिनव द्वारा शुक्रवार को ही विद्यालय मैं कार्यरत अस्थाई संविदा अध्यापकों एवं कार्यालय सहायकों की सेवा समाप्त कर दी गई थी एवं विद्यालय में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं को राजकीय इंटर कॉलेज की कक्षाओं में अध्ययन करने हेतु आदेशित किया गया था।


परंतु आज छात्र-छात्राएं इस फैसले के विरोध में कक्षाओं में ना जाकर उप जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। दूसरी ओर सरकार के इस फैसले के विरोध में राजीव गांधी अभिनव विद्यालय के अभिभावकों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई है जिस पर माननीय उच्च न्यायालय के सम्मुख 8 जून को सुनवाई होनी है।

दूसरीीी ओर विद्यालय प्रशासन द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक से सेवा समाप्ति का नोटिस दिए जाने के बाद विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों एवं कार्यालय कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैला हुआ है। उनका कहना है कि सरकार के इस एकतरफा निर्णय से उनके सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है। अस्थाई कर्मचारियों ने बिना उनका पक्ष सुने और बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से हटा दिए जाने के सरकार के फैसले को अमानवीय करार दिया है। उनका कहना है कि यदि सरकार राजीव गांधी अभिनव विद्यालयों को दूसरेे विद्यालयों में विलय करकेे यहां के छात्र-छात्राओंं को समायोजित कर रही है तो हमारा भी समायोजन होना चाहिए। उन्होंनेे कहा की यदि सरकारर इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं करती है तो वह अपनी पीड़ा को मानवाधिकार आयोग के सम्मुख भी रखेंगे।
इस अवसर पर राजीव गांधी अभिनव आवासीय विद्यालय के बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावक और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी धरने पर डटे रहे।

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