रूद्रप्रयाग

जलते अंगारों पर नृत्य कर जाख देवता ने भक्तों को दिए दर्शन

आस्था और भक्ति का अतभुत मेला

रिपोर्ट/ नितिन जमलोकी
गुप्तकाशी। जनपद रुद्रप्रयाग के विकास खण्ड ऊखीमठ में स्थित जाखधार में जाख देवता का मेला हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हर्षोउल्लास के साथ संपन्न हुआ।
मान्यताओं के अनुसार 11वीं सदी से चली आ रही यह परम्परा आज भी उतने उत्साह से मनाई जाती है, जितने उत्साह से सैकड़ों वर्ष पूर्व मनाई जाती थी।
यहां जाख देवता हजारों वर्षो से चली आ रही देवी परम्परा के अनुसार जलते अंगारो के अग्नि कुण्ड में कूदकर साक्षात दर्शन देते हैँ, यह एक अदभूत चमत्कार भी माना जाता है, इसी लिए उत्तराखण्ड को देवभूमि कहा जाता है।
बैशाख मास की दो गते को हर वर्ष मनाए जाने वाला यह मेला आज शुक्रवार को दोपहर में जाख देवता की देव यात्र भेतसेम गांव, क्वठ्याड़ा गांव होते हुए देवशाल गांव पंहुंची। यहां ढोल, नगाड़ो तथा भाणा.भंकोरों के साथ भगवान जाख की यात्रा का देवशाल गांव के ब्राह्मणों ने हरियाली व फूल से बनी मालाओं से भव्य स्वागत किया। इस दौरान देवशाल के देवशाली ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चारण कर भगवान शिव की स्तुति की। जिसके बाद देवशाल में जाख पश्वा ने विंध्यवासिनी मंदिर की परिक्रमा की। साथ ही सूक्ष्म विराम के बाद भगवान जाख की यात्रा ग्रामीण श्रद्धालुओं के साथ देवशाल गांव के खेत खलियानों से होते हुए अपने देवस्थल जाख में पहुंची।
इस दौरान देवशाल गांव से जाख तक सैकड़ों की संख्या में लोगों ने भगवान जाख के जयकारों लगाये जिससे क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। जहां हजारों की संख्या में अपने भक्तों की भीड़ देखकर भगवान अति प्रसन्न हुए। जिसके बाद मंदिर परिसर के चारों ओर आसमान में बादल छाने लगे और हल्की बारिश हुई।
जाख देवता के साक्षात दर्शन होते हैँ जब भगवान शिव के यक्ष स्वरूप जाख में धधकते हुए अंगारों में नृत्य कर भक्तों को दर्शन देते हैं, इस दौरान हजारों की संख्या में ग्रामीण एवं क्षेत्रीय श्रद्धालु भगवान जाख देवता के जयकारे लगाकर ओर भगवान के साक्षात् दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं। इससे पूर्व रात्रि को मूंडी प्रज्वलन की परंपरा भी सम्पन्न की गई। जिसमें स्थानीय ग्रामीणों ने यहां एकत्रित होकर प्रसाद वितरण किया।

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