उत्तराखंड

नव रूप में पूजा की जाती है माता रानी की

भारत का एक मात्र मन्दिर

देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा एक स्थान पर संपन्न होती है जोशीमठ में नृसिंह मंदिर परिसर में ही मां दुर्गा मंदिर भी स्थित है। मंदिर में मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री की प्रतिमा स्थापित है।

यह देश का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा एक स्थान पर संपन्न होती है। यहां मंदिर के गर्भगृह में पाषाण कालीन मां दुर्गा की नौ प्रतिमा हैं। नवरात्र आयोजन के लिए क्षेत्र की ध्याणियां भी अपने मायके पहुंच गई हैं। जोशीमठ में नृसिंह मंदिर परिसर में ही मां दुर्गा मंदिर भी स्थित है। मंदिर में मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री की प्रतिमा स्थापित है।महाभारत काल में पांडवों द्वारा बनाया गया यह मंदिर, मान्यता है कि यह मंदिर महाभारत काल में पांडवों की ओर से बनाया गया था। आठवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने भारतवर्ष में पूर्णागिरी पीठ की स्थापना की थी, जिनमें से एक जोशीमठ का नव दुर्गा मंदिर भी शामिल है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 11वीं शताब्दी में कत्यूरी राजा ने किया था। नव दुर्गा मंदिर में मक्खन का विशेष महत्व है। श्रद्धालु मां दुर्गा की प्रतिमाओं को मक्खन का भोग लगाते हैं। मान्यता है कि मां दुर्गा को मक्खन का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं। चार धाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ पहुंचने वाले तीर्थयात्री मां दुर्गा के मंदिर में मत्था टेकना नहीं भूलते।

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