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मंत्री न बनाए जाने से आहत हैं भाजपा के कई विधायक

देहरादून-अगर सपना हो सीएम बनने का और मंत्री भी न बनाया जाए। या फिर उम्मीद हो यह कि पिछली बार मंत्री नहीं बनाया कोई बात नहीं इस बार तो मंत्री बनाया ही जा सकता है और इस बार भी किनारे कर दिया अथवा पहले मंत्री थे तो अब क्यों नहीं मंत्री बनाया जाएगा लेकिन पत्ता साफ कर दिया जाए तो झटका तो लगेगा ही और मलाल होना भी स्वाभाविक है।
नई सरकार के गठन के बाद भाजपा के कई बड़े-बड़े चेहरों की रंगत उड़ गई है क्योंकि उन्हें मंत्री न बनाए जाने से बड़ी निराशा हुई है। इस निराशा में उन्हें परेशानी इस बेबसी ने और भी अधिक बढ़ा दी है कि वह कुछ कह भी नहीं सकते। अपने रुसवा होने का दर्द वह कह भी नहीं पा रहे हैं और इस दर्द को सह भी नहीं पा रहे हैं। उनके अपने और नजदीकी लोग उन्हें समझा रहे हैं कि अभी भी उम्मीद बरकरार है इसलिए हताश न हो तीन मंत्री पद ही खाली नहीं है पार्टी के पिटारे में बहुत कुछ विशेष है हो सकता है कि उन्हें कोई बहुत बड़ी जिम्मेदारी दे दी जाए। लेकिन यह कहकर कि अब जो होना था हो चुका पछताने से कुछ हासिल होने वाला नहीं उनके जले पर नमक भी छिड़कने का काम किया जा रहा है।
पूर्ववर्ती सरकार में कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता रहे मदन कोशिक जिन्हें चुनाव पूर्व प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंप दी गई थी इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए गए साथ ही अब प्रदेश अध्यक्ष के भी बदले जाने की चर्चाओं के बीच वह हैरान परेशान हैं। मगर दर्दे बंया की स्थिति में नहीं है और कह रहे हैं कि कोई नाराजगी नहीं है। बात बिशन सिंह चुफाल की हो या बंशीधर भगत की राजनीति के इस मुकाम पर यह दिन भी देखने पड़ेंगे इसे लेकर हैरान परेशान हैं। विधायक खजान दास और उमेश शर्मा काऊ तथा विनोद चमोली का मंत्री न बन पाने की हसरतों को भी करारा झटका लगा है। पूर्व मंत्री अरविंद पांडे भी मंत्री न बनाए जाने से निराश हैं। दो-दो, चार-चार बार चुनाव जीत कर भी मंत्री न बन पाने वाले विधायकों की फेहरिस्त काफी लंबी है। भले ही वह जानते हैं कि सिर्फ 11 विधायकों को ही मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन आशा और उम्मीदों पर ही जीवन चलता है। भाजपा के यह नेता अपनी स्थिति को भी जानते समझते हैं उन्हें पता है कि विरोध किया तो फिर वह भी नहीं मिलेगा जो मिल सकता है। इसलिए अनुशासन का लबादा ओढ़कर कर्मठ कार्यकर्ता बने रहने में ही भलाई है और वही सब कर भी रहे हैं।

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