उत्तराखंड

तुंगनाथ मंदिर परिसर में फैली गंदगी से स्थानीय लोगों में आक्रोश।

हक - हकूकधारियों ने की मांग शीतकाल में मन्दिर परिसर में पर्यटकों की आवाजाही हो बंद,

भगवान तुंगनाथ के कपाट शीतकाल मे बंद होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में पर्यटक भारी बर्फवारी का लुफ्त लेने धाम तक पहुंच रहे हैं, जिनके द्वारा धाम के चारों ओर गंदगी की जा रही है। धाम में फैली गंदगी को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।

रुद्रप्रयाग। पंचकेदारों में तृतीय केदार के नाम से विख्यात तुंगनाथ धाम में जगह-जगह गंदगी फैली हुई है। गंदगी फैलने के कारण पर्यावरण पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय हक-हकूकधारी लंबे समय से कपाट बंद होने के बाद धाम में किसी भी प्रकार की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गयी है। जिस कारण धाम की अलौकिक सुंदरता भी बदरंग होती जा रही है।


बता दें कि तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट शीतकाल में बंद हैं, बावजूद इसके सैकड़ों की संख्या में पर्यटक धाम पहुंच रहे हैं। चोपता-दुगलबिट्टा में बर्फ नहीं होने के कारण पर्यटक तुंगनाथ धाम पहुंच रहे हैं और मंदिर परिसर के साथ ही पैदल मार्ग के जगह-जगह कूड़ा फेंक रहे हैं। जिससे धाम की पवित्रता प्रभावित हो रही है। विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर तुंगनाथ के कपाट बंद होने के बाद लगातार पर्यटकों की आवाजाही हो रही है, जिस कारण पैदल मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
चोपता से तुंगनाथ व चंद्रशिला पैदल ट्रैक पर शीतकाल में बर्फबारी के बाद हजारों पर्यटक घूमने पहुंचते हैं। इसके बावजूद भी जिला प्रशासन की ओर से तुंगनाथ धाम में साफ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। चोपता से लेकर तुंगनाथ तक एक भी सार्वजनिक शौचालय नहीं है। यहां आने वाले हजारों पर्यटक पानी की बोतलें, खाने पीने की सामग्री, कूड़ा व कचरे को जगह – जगह फेंक देते हैं। जिससे कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। स्थानीय हक-हकूकधारी लंबे समय से कपाट बंद होने के बाद धाम में किसी भी प्रकार की आवाजाही पर रोक लगाने की मांग करते आ रहे हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से इनकी एक नहीं सुनी जा रही है।

स्थानीयों का कहना है कि कपाट बंद होने के बाद छह माह तक भगवान शिव समाधि अवस्था में होते हैं. इसलिए उनकी समाधि को भंग करना ठीक नहीं है। तुंगनाथ मंदिर के पुजारी रामप्रसाद मैठाणी ने कहा कि शीतकाल में मानव प्रवेश निषेध होता है। इस समय धाम में आवाजाही करना हमारी पौराणिक परंपरा के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को बताया जा चुका है, लेकिन प्रशासन इस संबंध में कोई भी कार्यवाही नहीं कर रहा है। तुंगनाथ मंदिर के प्रबंधक बलबीर नेगी ने बताया कि धाम में पर्यटकों की आवाजाही के कारण गंदगी फैल गई है, जिसके लिए टीम भेज दी गई। उन्होंने कहा कि धाम सहित पैदल मार्ग पर गंदगी फैलने के बाद टीम को भेजा जाता है। धाम में अभी भी बर्फबारी हो रही है, जिस कारण जाने में दिक्कतें होती हैं। ऐसे में मौसम साफ होने पर कूड़े-कचरे की समस्या का समाधान किया जाता है।

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