राजनीति

विधानसभा चुनाव 2022 : पुरानी पेंशन योजना बहाली बन सकता है बड़ा मुद्दा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव मैं समाजवादी पार्टी ने पुरानी पेंशन योजना को सरकार बनते ही बहाल किए जाने की की घोषणा

देहरादून: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उनकी सरकार आते ही पुरानी पेंशन योजना को बहाल किए जाने की घोषणा करके उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड में दोबारा सरकार बनाने की कोशिश में लगी भारतीय जनता पार्टी और भारतीय जनता पार्टी को दोनों प्रदेशों से बाहर कर सरकार बनाने का सपना देख रही कांग्रेस के सामने संकट की स्थिति खड़ी कर दी है। समाजवादी पार्टी ने कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों के अहम पुरानी पेंशन योजना के मुद्दे को अपने घोषणापत्र में सम्मिलित कर दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को इस मुद्दे पर विचार करने हेतु विवश कर दिया है। जहां एक और पुरानी पेंशन योजना को खत्म कर नई पेंशन योजना की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई जी के समय में शुरू हुई थी वही कांग्रेस शासित प्रदेशों में भी नई पेंशन योजना देर सवेरे लागू कर दी गई। स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही नई पेंशन योजना को लागू करने के पक्ष में थे। जबकि अगर बात पश्चिम बंगाल की की जाए तो वहां पर सरकार ने कर्मचारियों के लिए आज तक नई पेंशन योजना लागू नहीं की है। दिल्ली जैसे राज्य में भी केजरीवाल सरकार ने विधानसभा से पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागूू करवाने का प्रस्ताव पास कर एलजी को भेज दिया लेकिन वह फाइल भी ठंडे बस्ते में चली गई।

उत्तर प्रदेश समेत उत्तराखंड में भी कर्मचारी और शिक्षकों की एक बड़ी तादाद काफी लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग करती आ रही है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने वर्तमान परिस्थिति को भांपते हुए उनकी सरकार बनते ही पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जाएगा की घोषणा करते ही दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के माथे पर निश्चित रूप से बल डाल दिया है। शिक्षकों कर्मचारियों के संगठन पिछले काफी समय से उस पार्टी के पक्ष में मतदान करने की बात कहते आ रहे हैं जो उनके लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करेगा। ऐसी स्थिति में देखने वाली बात यह होगी कि क्या भाजपा या कांग्रेस पुरानी पेंशन योजना और पुलिस ग्रेड पे से संबंधित अहम समस्याओं को अपने घोषणापत्र में डालकर राजकीय कर्मचारियों का विश्वास हासिल कर पाते हैं अथवा दोनों राष्ट्रीय पार्टियां इसे ठंडे बस्ते में डालकर अन्य राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समस्याओं को चुनावी मुद्दा बनाती हैं। उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य में जहां सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों का सरकार बनाने और गिराने में काफी अहम योगदान होता है, पुरानी पेंशन योजना को ठंडे बस्ते में रखना वर्तमान परिस्थिति के अनुसार भाजपा और कांग्रेस के लिए आसान नहीं होगा। बहरहाल स्थिति जो भी हो लेकिन अखिलेश यादव ने कर्मचारियों के इस अहम मुद्दे को उठाकर रेस में अभी तक पीछे चल रही समाजवादी पार्टी को वापस मुकाबले में खड़ा कर दिया है।

वही बात अगर उत्तराखंड की की जाए दोनों राष्ट्रीय पार्टियां एवं उत्तराखंड आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका में रहा क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल अपने अपने खोए हुए अस्तित्व को पुनः स्थापित करने के लिए इस मुद्दे पर खामोश रहकर यहां के बड़े वोट बैंक शिक्षकों और कर्मचारियों को नाराज कतई नहीं करना चाहेंगे।

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