देहरादून

संस्कृति और परंपरा का संगम बनी नवादा की रामलीला — मीना बास्कंडी ने सूर्पनखा के रूप में जीता दर्शकों का दिल

देहरादून/नवादा। श्री राम दर्शन रामलीला समिति (पंजीकृत) नवादा द्वारा आयोजित भव्य रामलीला इन दिनों क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल का केंद्र बनी हुई है। इस रामलीला ने न केवल परंपरागत लोकनाट्य कला को जीवित रखा है, बल्कि नए कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच भी प्रदान किया है।

रामलीला के छठे दिन मंचित “सूर्पनखा प्रसंग” ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस प्रसंग में सूर्पनखा की भूमिका निभाने वाली मीना बास्कंडी ने अपने सशक्त अभिनय, भाव-भंगिमाओं और संवाद अदायगी से समूचे पंडाल को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शकों ने उनके प्रदर्शन पर तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।

कार्यक्रम में डोईवाला ब्लॉक प्रमुख गौरव सिंह गिनी, समाजसेवी सुभाष भट्ट, राजेश मित्तल, कपोतरी देवी मझेडा, बीना देवी मेड़ा, शिव सिंह रावत और शिव सिंह खुगशाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अतिथियों ने समिति के इस सांस्कृतिक आयोजन की सराहना की और कहा कि ऐसी रामलीलाएं समाज में संस्कृति और आस्था का संदेश देती हैं।

समिति के अध्यक्ष सूर्य भट्ट ने कहा कि रामलीला केवल मंचन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, मर्यादा और परंपरा को जीवित रखने का माध्यम है। उन्होंने युवाओं से इस मंच से जुड़कर भारतीय मूल्यों को आगे बढ़ाने की अपील की।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुभाष चंद्र पुरोहित और श्रीमती विजया सेमवाल ने संयुक्त रूप से किया।

इस अवसर पर नवादा जन कल्याण समिति (पंजीकृत), उत्तरांचल सेक्टर-3 विकास समिति, 4 जी प्लस फाउंडेशन और विभिन्न कीर्तन मंडलियों को भी सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. राकेश उनियाल, गौरी रौतेला, ज्योतिका पांडे, आशा नेगी, अनुज पुरोहित, दीपा रावत सहित अनेक रामभक्तों की उपस्थिति रही।

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