बज उठा चुनावी बिगुल। राष्ट्रीय पार्टियों सहित क्षेत्रीय नेता भी एक्टिव मोड में।
केदारनाथ की पूर्व विधायक स्व० श्रीमती शैलारानी रावत के निधन के पश्चात इस सीट पर होने हैं उपचुनाव।

रूद्रप्रयाग: केदारनाथ की पूर्व विधायक स्व० श्रीमती शैलारानी रावत के निधन के पश्चात खाली हुई केदारनाथ विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव की तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग द्वारा कर दिया गया है। इस सीट हेतु होने वाले उप चुनाव में 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे जबकि 23 नवंबर को मतों की गिनती की जाएगी। चुनाव की तिथि की घोषणा के साथ ही जिले में आदर्श चुनावी आचार संहिता भी प्रभावी हो गई है।
चुनाव की तिथि घोषित होते ही केदार घाटी में राजनीतिक माहौल भी गरमाने लग गया है। दोनों राष्ट्रीय पार्टियों भारतीय जनता पार्टी एवं कांग्रेस इस सीट को अपने कब्जे में करने के लिए किसी भी प्रकार की कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं। कुछ समय पूर्व बद्रीनाथ और मंगलोर सीट के लिए हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी को जहां केदारनाथ सीट बचाने की चुनौती होगी वहीं दूसरी ओर कांग्रेस भी इस सीट को भाजपा से छीनकर अपने कब्जे में करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है। यही कारण है कि केदारनाथ सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व भी एक्टिव मोड में आ गया है।
कौन है संभावित दावेदार?
अगर प्रत्याशीयों की बात करें तो दोनों पार्टियों को प्रत्याशियों का चुनाव करना आसान नहीं होगा। दोनों ओर से संभावित दावेदार टिकट हासिल करने के लिए जोर लगाए हुए हैं। भाजपा की ओर से पूर्व विधायक श्रीमती शैला रानी रावत की पुत्री ऐश्वर्या रावत, भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती आशा नौटियाल, निर्दलीय के तौर पर पिछले विधानसभा में दोनों पार्टियों के लिए चुनौती बने एवं वर्तमान मे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य कुलदीप रावत, दर्जाधारी राज्य मंत्री और पूर्व जिला पंचायत रुद्रप्रयाग अध्यक्ष चंडी प्रसाद भट्ट का नाम टिकट के दावेदारों में जहां आगे चल रहा है वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की ओर से पूर्व विधायक मनोज रावत, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष कुंवर सजवाण का नाम सुर्खियों में है।
दूसरी ओर चुनाव आचार संहिता से पहले मुख्यमंत्री ने केदारनाथ विधानसभा के लिए कई मोटर मार्ग और अन्य कार्यों की वित्तीय स्वीकृति देकर जनता को अपने पक्ष में रिझाने की कोशिश की है। अब गेम जनता के पाले में है। अगले एक महीने में तय हो जाएगा कि केदारनाथ को अगला विधायक कौन मिलने वाला है।



