खुद को स्वर्गीय विधायक का धर्म पुत्र बताकर की टिकट की दावेदारी: भाजपा की बढ़ी मुश्किलें
गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके हैं दावेदार

रूद्रप्रयाग: केदारनाथ विधानसभा उपचुनाव में टिकट आवंटन में दावेदारों की संख्या को लेकर पहले से ही उलझी भाजपा के सामने अब नयीं मुश्किल खड़ी हो गई है। इस सीट पर भाजपा की ओर से पहले ही दावेदारों की लंबी फेहरिस्त में एक नाम और जुड़ गया है। स्वयं को स्व० श्रीमती शैला रानी रावत का दत्तक पुत्र बताने वाले और गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष जयदीप सिंह बर्तवाल ने भी भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से स्व०रावत के साथ पारिवारिक रिश्ता होने के नाते टिकट की दावेदारी की है।
रुद्रप्रयाग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि हालांकि दिवंगत विधायक के साथ उनका खून का रिश्ता नहीं है लेकिन जो रिश्ता उनका उनके साथ था वह खून के रिश्ते से भी बढ़कर था। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने न सिर्फ टिकट की दावेदारी की बल्कि स्वर्गीय रावत के परिवार जनों पर इलाज के दौरान लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया।

उन्होंने दावा किया कि वह पिछले कई दशकों से स्वर्गीय विधायक के दत्तक पुत्र के रूप में उनकी सेवा कर रहे थे। स्वर्गीय विधायक की अंतिम इच्छा थी कि उनकी राजनीतिक विरासत को वही आगे बढ़ाएं। परंतु अंतिम समय में परिवार जनों द्वारा उनके खिलाफ पुलिस में झूठी शिकायत दर्ज की गई और अंतिम संस्कार में उनसे मुखाग्नि तक का हक छीना गया। अपने संबोधन के दौरान वह स्वर्गीय विधायक को बार-बार ‘मम्मा’ शब्द से संबोधित कर उनसे अपनी नजदीकी बताते हुए दिखे।
उन्होंने भाजपा हाई कमान से मांग की कि अगर मृतक आश्रित के रूप में भाजपा टिकट देती है तो उनका इस सीट पर पहला अधिकार है। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी जिसको भी प्रत्याशी घोषित करेगी वह उसे जिताने के लिए दिन-रात कार्य करेंगे।
हालांकि अंतिम निर्णय भाजपा हाई कमान को ही करना है परंतु जयदीप सिंह के सामने आने से अब तक स्वर्गीय शैला रानी रावत की इकलौती आश्रित के रूप में टिकट की दावेदारी कर रही उनकी पुत्री ऐश्वर्या रावत की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है।



